बहुत से लोग जीवन में बड़े फैसले लेते हुए लोन लेते हैं — जैसे बिज़नेस खड़ा करना, घर बनाना, गाड़ी खरीदना या अन्य खर्च उठाना। लेकिन एक बात भूल जाते हैं--लोन सिर्फ “धार” नहीं होता, बल्कि हर महीने आता है एक चुकता-रूपा दर्ज़ी जिसका नाम है Equated Monthly Installment (EMI) और जिससे आपका अधिकांश पैसा सूद की आग में जल जाता है। इस लेख में हम देखेंगे कि कैसे “कम ब्याज” सुनकर लोन ले लेना, कभी-कभी आपके लिए भारी पड़ सकता है, क्यों शुरुआत में आपका प्रिंसिपल बहुत धीरे कम होता है, और हम क्या करने से इस जाल से निकल सकते हैं।
आपने २५ लाख रुपये का लोन लिया, अवधि ५ साल, ब्याज दर १४.৪९%। प्रतिमाह आपका EMI लगभग ₹55,500 होता है। इसका मतलब है कि सालाना करीब ₹6.66 लाख देना होगा। आपने सोचा होगा — “मैं सालाना ६.६ लाख दे रहा हूँ, उसमें से १.५ लाख तो ब्याज जाएगा और बाकी ५ लाख मूलधन कम होगा।”
लेकिन वास्तविकता यह है कि पहले साल में आपने जितना दिया, उसमें से अधिकार से भी ज्यादा हिस्सा ब्याज में चला गया। आपका मूलधन सिर्फ करीब ₹3–3.5 लाख ही कम हुआ। बाकी करीब ₹3 लाख या उससे अधिक ब्याज के नाम पर कट गया।
यह इसलिए क्योंकि यह है Amortization या “घटती शेषता वाला लोन” तरीका (reducing-balance) जिसमें--
EMI हर महीने लगभग बराबर रहता है।
लेकिन पहले महीनों में EMI का एक बहुत बड़ा हिस्सा सूद (interest) पर जाता है।
प्रिंसिपल (मूलधन) कम हिस्से में जाता है, इसलिए शेष लोन राशि धीमी गति से घटती है।
जैसे-जैसे समय बढ़ता है, शेष राशि कम होती जाती है और EMI के भीतर प्रिंसिपल का हिस्सा बढ़ता जाता है तथा सूद का हिस्सा घटता जाता है।
इसलिए आपने देख लिया — “मैं सालाना ६.६ लाख दे रहा हूँ” लेकिन मूलधन-घटाव सिर्फ ३ लाख के आसपास। इस बीच आपका परिवार, भविष्य, मानसिक शांति प्रभावित हो सकती है अगर अचानक आमदनी बंद हो जाए, नौकरी छूट जाए, व्यापार डूब जाए या स्वास्थ्य बिगड़ जाए।
लोन लेना सिर्फ तुरंत धन मिलना नहीं है — यह एक लंबी अवधि की जिम्मेदारी है।
EMI के फॉर्मूले को समझना बहुत ज़रूरी है: यह जानना कि हर महीने कितना हिस्सा सूद के नाम पर कट रहा है और कितना हिस्सा मूलधन कम कर रहा है।
शुरुआत में सूद का हिस्सा ज़्यादा होता है—इसलिए आगे का भविष्य भी ध्यान में रखकर प्लान करें।
लोन लेने से पहले EMI की पूरी शेड्यूल (amortization schedule) देखें--कॉपी बैंक/फ्रैंचाइज़र से माँगें, जानें कि पहले वर्ष में, तीसरे वर्ष में, पांचवें वर्ष में कितना मूलधन कम होगा।
अगर संभव हो तो जल्दी चुकता (pre-payment) करने पर विचार करें — अतिरिक्त राशि सीधे मूलधन पर जाए तो कुल सूद कम होती है।
लोन लेना ही सबसे अच्छा विकल्प नहीं हमेशा — यदि आय अनिश्चित है, व्यवसाय जोखिम में है, बेहतर हो सकता है अन्य विकल्पों पर विचार करें।
लोन लेने से पहले शोध करें: अलग-अलग बैंकों/फ़ाइनेंस कंपनियों से ब्याज दरें, फीस, अन्य चार्ज देखें।
EMI आसान हो सके उतना रखें — लोन अवधि बढ़ाना बेहतर विकल्प नहीं क्योंकि कुल सूद बहुत बढ़ सकती है।
अतिरिक्त राशि से मूलधन कम करें — जैसे बोनस, टैक्स वापस मिलना, ओवरटाइम आदि से। इससे शेष राशि जल्दी घटेगी और सूद कम होगी।
आपातकालीन फंड रखें — यदि आय रोकी जाए या अचानक खर्च बढ़ जाए, तो आपका EMI न चुका पाना परिवार व सम्पत्ति पर भारी पड़ सकता है।
दूसरे विकल्प तलाशें — जैसे सही समय पर लोन लेना, बढ़ती ब्याज दरों पर लोन लेने से बचना, या ग्रुप-सेविंग, आत्म-निर्भर थोड़े फंड इकट्ठा करना।
शिक्षित बनें: इस तरह की आर्थिक प्रक्रियाओं को समझना सार्वभौमिक आवश्यकता है — सिर्फ “लोन मिल गया” यह खुशी न हो जाए।
लोन लेना आसान है — लेकिन उस लोन के पीछे छिपा भारी सूद बोझ अक्सर समझा जाता नहीं। अगर आपने २५ लाख रुपये का लोन लिया १४.४९% ब्याज पर पाँच साल के लिए, तो EMI लगभग ५५,५०० रुपये प्रतिमाह होगी। लेकिन पहले साल में आपके द्वारा दिया गया राशि का आधे से अधिक हिस्सा सिर्फ ब्याज के नाम पर कट जाता है, और मूलधन बहुत कम कम होता है। यही है अमॉर्टाइजेशन का सच।
यदि आप इस ज्ञान से सजग होंगे, समय से पहले प्रबंधन करेंगे, अतिरिक्त राशि से मूलधन कम करेंगे, आप इस जाल से बच सकते हैं। आपका भविष्य, आपका परिवार, आपके सपने इस एक निर्णय से प्रभावित हो सकते हैं।
हम आशा करते हैं कि यह लेख आपके, आपके परिवार और मित्रों के लिए सचेत रहने का संदेश बने।
की सिख मिली: लोन सिर्फ “पैसा लेना” नहीं, बल्कि “बहुत-बहुत सोच-समझकर जिम्मेदारी लेना” है।
इसे बेहतर कैसे करें: EMI शेड्यूल समझें, अतिरिक्त भुगतान करने का विकल्प रखें, और हल्की-धीमी लोन अवधि तथा समुचित आपात फंड रखें।
दूसरों की मदद कैसे करें: यह लेख अपने परिवार, मित्रों, सहकर्मियों के साथ साझा करें ताकि वे भी इस वित्तीय जाल को समझें और सुरक्षित विकल्प चुन सकें।
यदि आप रोज़ाना ऐसे ट्रेंडिंग वित्तीय विषयों, सा